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कालाधन मामला: एचएसबीसी बैंक पर आईटी का शिकंजा, दर्ज होगी शिकायत

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नई दिल्ली। ब्रिटिश बैंक एचएसबीसी की भारतीय इकाई पर टैक्स चोरी में मदद करने के सनसनीखेज खुलासे को केंद्र सरकार ने गंभीरता से लिया है। आयकर विभाग ने जेनेवा स्थिति एचएसबीसी बैंक के खिलाफ मामला दायर करने का फैसला किया है। इसमें बैंक पर आरोप लगाया जाएगा कि उसने भारत में आयकर की चोरी में मदद की है। जबकि काले धन पर गठित विशेष जांच दल (एसआइटी) की नजर भी इस रहस्योद्घाटन पर है।

दरअसल, देश में काले धन के मामले की राजनीतिक अहमियत समझते हुए राजग सरकार कोई भी कसर नहीं छोड़ना चाहती। विपक्षी दल लगातार मोदी सरकार पर आरोप लगा रहे हैं कि सत्ता में आने के नौ माह बाद भी वह विदेश से काला धन लाने के लिए कुछ खास नहीं कर पाई है।

सूत्रों के मुताबिक आयकर की धारा 278 के तहत एचएसबीसी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस धारा के तहत उस व्यक्ति या संस्थान के खिलाफ कार्रवाई की जाती है जो किसी दूसरे व्यक्ति को जानबूझ कर गलत तरीके से इनकम टैक्स रिटर्न भरने में मदद करे। इसका उद्देश्य रिटर्न भरने वाले व्यक्ति को कर बचाने में मदद करना भी हो सकता है। इस धारा के तहत दोषी व्यक्तियों पर जुर्माने के अलावा छह महीने से सात वर्ष तक की कैद हो सकती है। आयकर विभाग को कम से कम चार ऐसे मामलों को लेकर पक्के सबूत मिले हैं, जिनसे साबित होता है कि एचएसबीसी ने भारतीय ग्राहकों से संबंधित सूचना अफसरों को नहीं दी। जबकि कानूनन उसे यह काम करना चाहिए था। बैंक ने न सिर्फ इन बड़े ग्राहकों की कमाई को देश से बाहर ले जाने में मदद की, बल्कि उस पर आयकर विभाग की नजर न पड़े, इसका भी इंतजाम किया।

आयकर विभाग ने एचएसबीसी के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए एसआइटी से आवश्यक मंजूरी भी ले ली है। विभाग के सूत्रों का कहना है कि विदेशी अखबारों ने एचएसबीसी इंडिया के जिन लेनदेनों का खुलासा किया है वे वित्त वर्ष 2006-07 के हैं। मौजूदा नियमों के मुताबिक नौ वर्ष से ज्यादा पुराने आयकर मामलों की जांच नहीं करवाई जा सकती है। इसलिए विभाग को 31 मार्च, 2015 से पहले बैंक के खिलाफ मामला दायर करना पड़ेगा। विभाग की इस तेजी के पीछे एक अन्य वजह यह भी है कि काले धन पर गठित एसआइटी को अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में सौंपनी है। ऐसे में सरकार अपनी तरफ से कोई कोताही नहीं करना चाहती।

अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों के एक संगठन आइसीआइजे ने एचएसबीसी जेनेवा के तरकीबन एक लाख ग्राहकों की सूची जारी की थी। साथ ही आरोप लगाया था कि इनके काले धन को खपाने में बैंक ने मदद पहुंचाई है। इसमें 1,668 भारतीयों के नाम भी शामिल है। सरकार का कहना है कि इनमें से 1,195 ग्राहकों को आयकर चोरी मामले में दोषी पाया जा सकता है। ये खाते 1969 से लेकर 2006 के बीच खोले गए हैं। अब देखना है कि सरकार की नई कोशिश काले धन को स्वदेश लाने में कितनी मददगार साबित होती है।

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