नई दिल्ली: प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने औषधीय पौधों के क्षेत्र में सहयोग हेतु भारत एवं साओ तोमे और प्रिन्सिपी के बीच सहमति पत्र (एमओयू) के लिए अपनी पूर्वव्यापी स्वीकृति दे दी है। इस एमओयू पर 14 मार्च, 2018 को हस्ताक्षर किए गए थे।
पृष्ठभूमि:
भारत जैव विविधता की दृष्टि से दुनियां के सर्वाधिक समृद्ध देशों में से एक है जहां 15 कृषि-जलवायु क्षेत्र हैं। फूलदार पौधों की 17000-18000 प्रजातियों में से 7000 से भी अधिक प्रजातियों का औषधीय उपयोग चिकित्सा की लोक एवं प्रलेखित प्रणालियों जैसे कि आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी (चिकित्सा की आयुष प्रणाली) में है। औषधीय पौधों की लगभग 1178 प्रजातियों का व्यापार किए जाने का अनुमान है जिनमें से 242 प्रजातियों का वार्षिक उपभोग स्तर 100 मीट्रिक टन से भी अधिक है। औषधीय पौधे न केवल पारंपरिक चिकित्सा और हर्बल उद्योग के लिए एक प्रमुख संसाधन आधार हैं, बल्कि ये भारत की आबादी के एक बड़े वर्ग को आजीविका एवं स्वास्थ्य संबंधी सुरक्षा भी सुलभ कराते हैं। पारंपरिक एवं वैकल्पिक स्वास्थ्य प्रणालियों के क्षेत्र में विश्व स्तर पर पुनरुत्थान हुआ है जिसके परिणामस्वरूप विश्व स्तर पर हर्बल व्यापार संभव हो पाया है जो फिलहाल 120 अरब अमेरिकी डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है और जिसके वर्ष 2050 तक बढ़कर 7 लाख करोड़ (ट्रिलियन) अमेरिकी डॉलर के स्तर पर पहुंच जाने की आशा है। इसके अलावा, विशेषकर उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में बड़ी संख्या में पाए जाने वाले ऐसे औषधीय पौधे भी हैं जो एक समान भू-जलवायु कारकों को देखते हुए दोनों ही देशों में समान रूप से उपलब्ध हैं।
साओ तोमे और प्रिन्सिपी में चिकित्सा एवं औषधीय पौध क्षेत्र की आयुष प्रणालियों के प्रचार-प्रसार की जरूरत को ध्यान में रखते हुए औषधीय पौधों के क्षेत्र में राष्ट्र स्तरीय सहयोग के लिए तैयार किए गए हमारे मानक मसौदा एमओयू को साओ तोमे और प्रिन्सिपी के लोकतांत्रिक गणराज्य के संबंधित प्राधिकरणों के साथ साझा किया गया था।