लखनऊ: भारत सरकार ने रेशम उद्योग को बढ़ावा देने के लिए ‘‘सिल्क इंडस्ट्री के विकास के लिए एकीकृत योजना’’ को मंजूरी प्रदान करते हुए। यह योजना अगले तीन वर्षों के लिए लागू करने का निर्णय लिया है। इसके माध्यम से महिलाओं, एससी/एसटी एवं अन्य कमजोर वर्गों के लिए आजीविका के अवसरों को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही वर्ष 2020 तक रोजगार को 85 लाख से बढ़ाकर एक करोड़ करने में मदद मिलेगी।
यह जानकारी सहायक सचिव, क्षेत्रीय कार्यालय रेशम बोर्ड वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार, सुश्री अल्का तिवारी ने आज दी है। उन्हांेने बताया कि इस योजना का उद्देश्य अनुसंधान एवं विकास, बीज संगठन और किसान विस्तार केंद्र की स्थापना के साथ ही बीज, धागा और रेशम उत्पादों के लिए समन्वय बनाना और मार्केटिंग तथा क्वालिटी सर्टिफिकेशन सिस्टम हेतु सिल्क टेस्टिंग की सुविधा उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि इस योजना के कार्यान्वयन के लिए 2161.68 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। यह योजना केन्द्रीय सिल्क बोर्ड (सीएसबी) के माध्यम से मंत्रालय द्वारा लागू की जाएगी।
सहायक सचिव ने बताया कि इस योजना से 2016-17 के दौरान हुए 30348 मीट्रिक टन रेशम उत्पादन को बढ़ा कर वर्ष 2019 -20 के अंत तक 38500 मीट्रिक टन तक पहुंचने की संभावना है। वर्ष 2020 तक प्रतिवर्ष 8500 मीट्रिक टन बाईवोल्टीरन रेशम का उत्पादन किया जायेगा, जिससे आयात को घटाया जा सके। उन्होंने बताया कि वर्ष 2019-20 के अंत तक 111 किलोग्राम रेशम प्रति हेक्टेयर उत्पादन हेतु अनुसंधान एवं विकास पर बल दिया जायेगा । वर्तमान में 100 किग्रा किलोग्राम रेशम प्रति हेक्टेयर उत्पादान हो रहा है। उन्होंने बाजार की मांग को पूरा करने के लिए गुणवत्ता वाले रेशम का उत्पादन करने के लिए मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत उन्नत रीलिंग मशीनों (शहतूत के लिए स्वतः रीलिंग मशीन, बेहतर रीलिंग/कताई मशीनों और वान्या रेशम के लिए बुनियाद रीलिंग मशीन) के बड़े पैमाने पर स्थापित कराने का प्रयास किया जायेगा।
सुश्री अल्का तिवारी ने बताया कि इस योजना का लक्ष्य वर्ष 2022 तक रेशम उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करना है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए, भारत में उच्च ग्रेड रेशम का उत्पादन वर्तमान के 11,326 मीट्रिक टन से 2022 तक 20,650 मीट्रिक टन तक पहुंच जाएगा, जिससे आयात कम किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पहली बार रेशम की उच्चतम गुणवत्ता के उत्पादन में सुधार पर ध्यान दिया गया है। वर्ष 2020 तक 4 ए ग्रेड रेशम को बढ़ाने का प्रस्ताव है। रोग प्रतिरोधक कीटाण्ड , खाद्य पौध सुधार तथा उत्पादकता बढ़ाने हेतु संबंधित अनुसंधान एवं विकास परियोजनाएं विज्ञान और प्रौद्योगिकी, कृषि और मानव संसाधन विकास मंत्रालयों के साथ सहयोग से लागू की जाएंगी।
सहायक सचिव ने बताया कि सीड केक्टेर के तहत, बीज उत्पादन इकाइयों में गुणवत्ता मानकों को लाने के लिए सुदृढीकरण किया जाएगा और रेशम उत्पादन लक्ष्य को पूरा करने के लिए उत्पादन क्षमता में वृद्धि के अलावा गुणवत्ता वाले बीज कोकून उत्पन्न करने के लिए उन्नत कोटि कीआण्ड उत्पादन के लिए सहायता प्रदान की जाएगी। इस योजना के तहत रेशम किसानों, बीज उत्पादकों और चॉकी रेयरर्स के सभी लाभार्थियों को डीबीटी मोड पर आधार लिंकेज के साथ लाया जाएगा। शिकायतों और सभी आउटरीच कार्यक्रमों के समय पर निपटाने के लिए एक हेल्पलाइन स्थापित की जाएगी।