लखनऊ: प्रदेश के विभिन्न जनपदों में मध्यम गहरी बोरिंगों एवं गहरी बोरिंगों के निर्माण के लिए लघु सिंचाई विभाग द्वारा विभिन्न विशिष्टियों के यू0पी0वी0सी0 पाइप का क्रय ई-टेण्डर के माध्यम से किया गया जिसके फलस्वरूप गत वर्ष के सापेक्ष दरों में 5ः (मध्यम गहरी बोरिंग) से लेकर 10ः (गहरी बोरिंग) तक की कमी आयी है। इससे लाभार्थी कृषक को मध्यम गहरी बोरिंग कराने में प्रति बोरिंग लगभग रू0 3350-4000 तथा गहरी बोरिंग के लाभार्थी कृषक को लगभग रू0 6700-9000 तक का कम व्ययभार वहन करना पड़ेगा।
यह जानकारी देते हुए प्रदेश के लघु सिंचाई मंत्री प्रो0 एस0 पी0 सिंह बघेल ने बताया कि इससे प्रदेश के 1039 गहरी बोरिंगों के कृषकों को रू0 70 से 93 लाख तक तथा मध्यम गहरी बोरिंग के 3837 कृषकों को रू0 128 से 150 लाख तक की बचत होगी। इस प्रकार पाइप की दरांे में कमी आने के कारण कृषकों को समान अनुदान पर अधिक पाइप दिया जा सकता है, अथवा बचत की धनराशि से अतिरिक्त कृषकों को लाभान्वित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इससे अतिरिक्त सिंचन क्षमता का सृजन भी होगा जो सरकार के ‘‘कृषकों की आय दुगनी’’ करने के संकल्प में एक सार्थक कदम होगा।
लघु सिंचाई मंत्री ने बतया कि विभाग द्वारा आपूर्ति का शेड््यूल इस प्रकार बनाया गया है कि प्रदेश के हर जनपद में हर माह पाइप की उपलब्धता बनी रहेगी। प्रदेश के सिंचाई की दृृष्टि से महत्वपूर्ण जनपदों सिद्धार्थनगर, श्रावस्ती, चित्रकूट, फतेहपुर, सोनभद्र, बलरामपुर, चन्दौली एवं बहराइच में प्राथमिकता के आधार पर पाइप की आपूर्ति की जा रही है और माह अक्टूबर तक इन जनपदों में पूरी पाइप की आपूर्ति कर दी जायेगी ताकि इनके लक्ष्यों की पूर्ति इस वर्ष के अन्त तक करके अतिरिक्त सिंचन क्षमता सृजित की जा सके।
प्रमुख सचिव, लघु सिंचाई एवं भूगर्भ जल विभाग श्रीमती मोनिका एस0 गर्ग ने बताया कि गत वर्ष 2017-18 में भी तथा उसके पूर्व वर्ष 2016-17 के मुकाबले में पाइप की आपूर्ति 8 से 12 प्रतिशत तक की कम दरों पर की गयी थी। उन्होंनें कहा कि विभाग का प्रयास है कि इस वर्ष माह जुलाई में ही पाइप की आपूर्ति क्षेत्र में आरम्भ हो जाए जिससे कृषकों की बोरिंग समय से पूर्ण हो सकेंगी। पाइप की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आपूर्ति प्राप्त करने के उपरान्त पोस्ट इंसपेक्शन की व्यवस्था को इस वर्ष अनिवार्य किया गया है।