वृंदावन के रंगनाथ मंदिर के दस दिवसीय ब्रह्मोत्सव में नित नए धार्मिक अनुष्ठान हो रहे हैं। मंगलवार सुबह भगवान गोदारंगमन्नार ने सोने के गरुड़ जी और शाम को हनुमानजी पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दिए। इस अवसर पर भगवान गोदारंगमन्नार की शोभायात्रा निकाली गई।
प्रात: काल भगवान रंगनाथ को वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य गरुड़ जी पर विराजमान कराया गया। इसके बाद भगवान निज मंदिर से निकलकर बारहद्वारी स्थित मंडप के सामने पहुंचे। जहां मंदिर के पुजारियों ने सस्वर पाठ किया गया।
करीब 15 मिनट तक पाठ करने के बाद सवारी ने बड़े बगीचा के लिए प्रस्थान किया। बैंड बाजों की मधुर धुन और दक्षिण भारत की परंपरागत शहनाई की धुन के बीच सवारी बड़े बगीचा पहुंची। इस दौरान भक्तों ने भगवान गोदारंगमन्नार के स्वागत में जगह-जगह रंगोली सजाकर और आरती उतारकर प्रसाद अर्पित किया।
गरुड़ सेवा और भक्ति के प्रतीक
मंदिर के सेवायत पुरषोत्तम स्वामी ने बताया कि पक्षीराज गरुड़ जी वेदों की आत्मा हैं। उनके पंखों से सामवेद का गायन होता है। गरुड़ जी पर वेद वैद्य भगवान विराजते हैं। इसी वाहन पर बैठकर प्रभु ने गजराज को ग्राह के फंदे से मुक्त कराया था। गरुड़ जी सेवा एवं भक्ति के प्रतीक हैं। इस सवारी के दर्शन का उद्देश्य प्राणी मात्र को प्रभु का स्मरण कराकर उसका ध्यान प्रभु भक्ति की ओर केंद्रित करना है।
उन्होंने बताया कि प्रभु का गरुड़ारूढ़ चिंतन ही मनुष्य को हनुमान जी की भांति भक्ति भाव प्रदान करने वाला है। भक्ति की भूमि श्रीधाम वृंदावन में इस सवारी के दर्शन से मनुष्य प्रभु की अहैतुकी कृपा प्राप्त कर भक्ति की ओर उन्मुख होता है। भक्तों ने भगवान गोदारंगमन्नार के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। वहीं सायं कालीन सत्र में मंदिर परिसर से हनुमानजी पर आरुढ़ होकर भगवान गोदारंगमन्नार ने भक्तों को दर्शन दिए।
सोर्स: यह Amar Ujala न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ श्रमजीवी जर्नलिस्ट टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.