नई दिल्ली: सरकारी कार्यक्रमों के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए परिवारों के वर्गीकरण के उद्देश्य से सरकार ने सामाजिक, आर्थिक और जाति जनगणना (एसईसीसी) मुहिम शुरू की थी, जो संपन्न हो गई है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने अपने कार्यक्रमों के अंतर्गत लाभार्थियों की पहचान करने और लाभार्थियों की प्राथमिकता सूची तैयार करने के लिए एसईसीसी आंकड़ों का उपयोग करने का निर्णय लिया है।
सामाजिक, आर्थिक और जाति जनगणना (एसईसीसी) के आंकड़ों का उपयोग कर राज्यों के लिए अनुसंधान आवंटन के प्रमुख मानदंड का अध्ययन करने तथा विभिन्न कार्यक्रमों के तहत लाभार्थियों की पहचान और प्राथमिकता देने के वास्ते पूर्व वित्त सचिव श्री सुमित बोस की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समूह का गठन किया गया था। समूह के अन्य सदस्य हैं –
- तब एएस (आरडी), अब एसआरडी श्री अमरजीत सिन्हा – सदस्य
- इंदिरा गांधी विकास अनुसंधान संस्थान (आईजीआईडीआर), मुंबई के
निदेशक डॉ. महेन्द्र देव – सदस्य
- विश्व बैंक में अर्थशास्त्री डॉ. रिंकू मुरगई – सदस्य
- जेएनयू, नई दिल्ली में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. हिमांशु – सदस्य
- ईए (आरडी) श्री मनोरंजन कुमार – सदस्य सचिव
ग्रामीण विकास मंत्रालय के साथ अंतरिम चर्चा के दौरान विशेषज्ञ समूह को लाभार्थियों के चयन के साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना- ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के लिए राज्यों के लिए संसाधन आवंटन के मानदंड का खाका तैयार करने को कहा गया था।
मंत्रालय ने विशेषज्ञ समूह के अंतरिम परामर्श को स्वीकार कर लिया है और इसी के अनुसार प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएजी) तथा दीन दयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के अंतर्गत परिवारों को कवर करने के लिए एसईसीसी आंकड़ों पर आधारित अंतर राज्यीय आवंटन के उचित दिशा-निर्देश जारी किये गये हैं।
विशेषज्ञ समूह ने निष्कर्ष निकाला है कि एसईसीसी आंकड़ों के इस्तेमाल और उसके टीआईएन नंबर से सरकार अपनी पहलों को अधिक प्रभावी बना सकती है, जिससे बेहतर परिणाम मिलेंगे।
विशेषज्ञ समूह के अध्यक्ष ने अपनी रिपोर्ट आज सुबह ग्रामीण विकास मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर को सौंपी। मंत्री महोदय ने सिफारिशों और उद्देश्यों के लिए विशेषज्ञ समूह के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की सराहना की।