लखनऊ: लापता बच्चों की खोज एवं बचाव हेतु आपरेशन स्माइल की तर्ज पर प्रदेश में आगामी पहली जुलाई से ‘‘आपरेशन मुस्कान’’ चलाया जायेगा। एक माह का यह विशेष अभियान 31 जुलाई तक चलेगा। अभियान शुरू करने के पूर्व इस कार्य में लगाये जाने वाले पुलिस कर्मियों को आवश्यक प्रशिक्षण देने के भी निर्देश दिये गये है। उल्लेखलीय है कि इससे पूर्व गाजियाबाद पुलिस द्वारा गुमशुदा बच्चोें की तलाश हेतु एक माह का विशेष अभियान ‘’आपरेशन स्माइल’’ वर्ष 2014 में चलाया गया था, जिसके दौरान विभिन्न राज्यों के निवासी एवं अपने घरों से बिछड़े बच्चों को खोज निकाला गया था। इस अभियान की सफलता को देखते हुए गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा इस वर्ष 1 जनवरी से 31 जनवरी तक इसी प्रकार का एक माह का विशेष अभियान पूरे देश में चलाये जाने के निर्देश दिये गये थे। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुये अब उक्त निर्णय लिया गया है।
प्रमुख सचिव गृह श्री देबाशीष पण्डा ने उक्त जानकारी देते हुए आज यहा बताया कि इस संबंध में शासन द्वारा पुलिस महानिदेशक को आवश्यक निर्देश दिये गये है। प्रमुख सचिव महिला एवं बाल विकास से समेकित बाल संरक्षण स्कीम (आई0सी0पी0एस0) के तहत सहयोग देने की अपेक्षा की गयी है साथ ही अपर पुलिस महानिदेशक महिला सेल को निर्देश दिये गये है कि वह प्रदेश में कार्यरत सभी 35 एण्टी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट को इस संबंध में जरूरी निर्देश अपने स्तर से प्रदान करेंगे। उन्होंने बताया कि इस संबंध में भारत सरकार से मिले निर्देशों की प्रति भी संबंधित अधिकारियों को भेजी गयी।
निर्देशों मे कहा गया है कि अभियान के दौरान सभी जिलों के शेल्टर होम्स, प्लेटफार्म, बस स्टेशनों, सड़कों एवं अन्य विभिन्न स्थानों आदि पर मिलने वाले बच्चों के सम्बन्ध मे प्रशिक्षित पुलिस कर्मियों द्वारा गहन छानबीन व आवश्यक सूचना संकलित की जाये। जो बच्चे लापता या गुमशुदा की श्रेणी मे पाये जायेंगे, उनके बारे मे एक निर्धारित प्रपत्र पर सभी जरूरी सूचनायें संकलित की जायेगी, जिसमे उस बच्चे का चित्र भी शामिल होगा। इस कार्यवाही मंे आवश्यकतानुसार वीडियो रिकार्डिंग भी करायी जायेगी।
श्री पण्डा ने बताया कि इस अभियान के तहत मिले बच्चों का सम्पूर्ण विवरण सम्बन्धित राज्यों द्वारा महिला एवं बाल विकास विभाग के ’’मिसिंग चाइल्ड’’ पोर्टल पर अपलोड कराये जाने के निर्देश दिये गये है। साथ ही इस अभियान के तहत मिले बच्चों का विवरण इलेक्ट्रानिक एवं प्रिन्ट मीडिया के माध्यम से भी प्रचारित-प्रसारित कराये जाने के भी निर्देश दिये गये है, ताकि उनके माता पिता, आश्रित एवं सम्बन्धित थानों की पुलिस को जानकारी हो सके।