लखनऊ: पुलिस अभिरक्षा में अभियुक्त/विचाराधीन बन्दियों को पेशी पर ले जाते समय पर्याप्त सावधानी के अभाव में अभियुक्तों के भाग जाने अथवा गन्तव्य पर न जाकर इधर-उधर जाकर अपने संगी-साथियों से मिलने की घटनाएॅ प्रकाश में आती हैं। ऐसी घटनाओं की रोकथाम हेतु श्री जावीद अहमद, पुलिस महानिदेशक, उ0प्र0 द्वारा दिनांक 03-11-2016 को परिपत्र के माध्यम से समस्त वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षकों को निम्न निर्देश दिये गये हैं ।
जिलाधिकारी एवं जेल प्रशासन से समन्वय स्थापित कर बन्दियों का उपचार कारागार परिसर में स्थापित चिकित्सालय में ही किया जाए। केवल गम्भीर बीमारी की स्थिति में ही नियमानुसार उन्हें अन्य चिकित्सालय में भेजने की अनुमति दी जाए।
- बंदियों को ले जाने के लिए गार्ड स्कोर्ट रूल्स के अनुसार सही संख्या में पुलिस कर्मी लगाये जाय। यदि कोई बन्दी जघन्य अपराध में लिप्त रहा है अथवा जिसके भागने की आशंका है, तो ऐसे बंदियों के साथ पुलिस कर्मियों की संख्या बढ़ाया जाये ।
- समय-समय पर पुलिस राजपत्रित स्तर के अधिकारी द्वारा एस्कोर्ट ड्यिूटी मंे लगे वाहनों की आकस्मिक चेकिंग करायी जाये ।
- एस्कोर्ट ड्यूटी हेतु जो कर्मी लगाये जायें, उनको प्रतिसार निरीक्षक का यह द्वारा पूर्व से भलीभांति ब्रीफ किया जाय।
- स्कोर्ट ड्यूटी में चल रहे कर्मियों को ऐसे वायरलेस सेट दिये जाने पर भी विचार किया जा सकता है जिनमें उन स्थानों की फ्रीक्वेन्सी हो, जहाॅ से यह प्रस्थान कर रहे है और जहाॅं पहुच रहें हैं। इससे स्कोर्ट कर्मियों की लोकेशन की जानकारी बनी रहेगी तथा यह भी आवश्यकता पड़ने पर विभाग को सूचित कर सकेंगे।
- कर्मचारियों को स्पष्ट रूप से निर्देश दिये जाये कि यदि कोई बन्दी बीमारी आदि की शिकायत करता है तो उसे सबसे पहले स्थानीय थाने अथवा जी0आर0पी0 थाने पर ले जायें। यदि वह गम्भीर अस्वस्थता में है तो आकस्मिक रूप से उसे अस्पताल ले जाया जा सकता है, किन्तु ऐसी स्थिति में स्थानीय पुलिस को इसकी तत्काल सूचना दी जाय।
- कर्मियों को यह भी स्पष्ट रूप से निर्देशित किया जाय कि वह अपराधियों को अन्य लोगों से मेल मिलाप या बात करने का अवसर न दें।
- कुछ गंभीर मामलों में जी0पी0एस0 का प्रयोग किया जाना भी उचित होगा जिससे कि जी0पी0एस0 के माध्यम से स्कोर्ट का सही पता लगाये जाने की मानीटरिंग कन्ट्रोल रूम द्वारा की जा सके।
- कैदियों की मा0न्यायालय में पेशी हेतु आवागमन/प्रस्तुतिकरण के समय उनके सहयोगियों/सम्बन्धियों एवं अवाॅछनीय तत्वों से सम्पर्क न होने पाये।
- कोई भी कैदी मोबाइल फोन का प्रयोग न करने पाये और न ही एस्कोर्ट ड्यिूटी में लगे पुलिस अधिकारियों/कर्मचारियों के मोबाइल से कहीं सम्पर्क कर सके।
- पेशी हेतु जाने वाले अपराधियों को मा0न्यायालय के अतिरिक्त अन्य किसी स्थान यथा-होटल, अस्पताल, गेस्ट हाउस आदि पर जाने न दिया जाय व एस्कोर्ट में लगे अधिकारी/कर्मचारी द्वारा स्वयं ऐसे अपराधियों द्वारा उपलब्ध कराये जा रहे खाद्य/पेय पदार्थ/रूकने के स्थान/वाहन आदि सुविधाओं का उपभोग कदापि न किया जाय।
- किसी भी हालत में एस्कोर्ट कर्मी बन्दी को उसके घर, रिश्तेदारी या अन्य किसी स्थान पर लेकर नहीं जायेगें और न ही आपराधिक व्यक्ति व उसके मित्रों/परिजनों द्वारा दिये गये वाहन का प्रयोग करंेगे।
- जिस न्यायालय में ऐसे बड़े अपराधी पेशी हेतु लाये जा रहे हैं, उस न्यायालय परिसर में एक राजपत्रित अधिकारी द्वारा आकस्मिक चेकिग करायी जाये ।
- अभियुक्तों का आवागमन सामान्यतः सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच करें। अपरिहार्य परिस्थिति में यदि रात्रि में यात्रा करना आवश्यक हो तो यथासम्भव सुरक्षित पुलिस वाहन का ही उपयोग किया जाय।
- यदि किसी कारण न्यायालय में प्रस्तुत करने से पूर्व अल्प विराम की आवश्यकता हो तो सम्बन्धित जिले के पुलिस अधीक्षक अथवा प्रभारी से बात करके अभियुक्तों को थाने के लाक-अप में रखा जाय।
- यदि अभियुक्तों को रात्रि विश्राम की आवश्यकता है तो ऐसी दशा में सम्बन्धित जिले की जेल में अभियुक्त को नियमानुसार दाखिल किया जाय।
उल्लेखनीय है कि दिनांक 01.01.2016 से अब तक 33 कैदी पुलिस अभिरक्षा से फरार हो चुके हैं, जिसके सम्बन्ध में 39 पुलिस कर्मियों के विरूद्ध 30 केस दर्ज किये गये हैं, 11 पुलिस कर्मी जेल भेजे जा चुके हैं तथा 15 पुलिस कर्मी निलंबित किये गये है।