देहरादून: विधान सभा सभा कक्ष में न्यायमूर्ति(से0नि0) राजेश टंडन, अध्यक्ष, राज्य विधि आयोग की अध्यक्षता में राज्य विधि आयोग की बैठक हुई। बैठक में नागरिकों के हितों के दृष्टिगत कठिनाईयों का निवारण करने के लिए त्वरित रूप से समुचित उपाय अपनाने के लिए सुझाव दिये गये।
1975 में जब Emergency देश में प्रभावी थी। तब Anticipatory bail का प्राविधान suspend किया गया था, जो अब तक उत्तराखण्ड में लागू है। अतः नागरिकों के हित को ध्यान में रखते हुए एवं विधिक कठिनाईयांे को ध्यान में रखकर पर्वतीय राज्य की समस्याओं को ध्यान में रखते हुुए Anticipatory bail की धारा 438 को राज्य में पुनर्जीवित किया जाय।
गौ रक्षा से सम्बंधित कानून मंे संशोधन किया जाए एवं नागरिकों के हित में एवं पर्वतीय राज्य के हित मे उचित कानून कि व्यवस्था कि जाए। साथ ही राज्य में गाय एवं अन्य आवारा पशुओं हेतु सरकारी आवास¼shelter home½ विकसित किए जाए। इस सम्बन्ध में मा0 उच्च न्यायालय द्वारा गाय को Living Creature का दर्जा दिया गया है।
अतिक्रमण के संबंध में मा0 उच्चतम न्यायालय एवं मा0 उच्च न्यायालय के आदेशों का समादर करते हुए, सरकार को यह सुझाव दिया जाए कि अतिक्रमण के मामले में नागरिकों को सुनवाई का पूरा मौका दिया जाए।
अन्य सुझावों के सम्बन्ध में राजस्व न्यायलयों के वादो को सिविल न्यायलय के अधिकार क्षेत्र में नागरिकों के हितों के लिए दिए जाने पर विचार किया गया।
उक्त बैठक मंे ‘‘हिमालय और हिन्दुस्तान’’ समाचार पत्र के अध्यक्ष एवं संपादक द्वारा न्यायमूर्ति श्री राजेश टंडन, अध्यक्ष, राज्य विधि आयोग उत्तराखण्ड को उनके द्वारा न्याय एवं विधिक सेवा क्षेत्र में किये गये उत्कृष्ट कार्यों, सेवाओं एवं उल्लेखनीय योगदान के निमित्त प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव, विधायी एवं संसदीय कार्य, न्याय विभाग श्रीमती मीना तिवारी, विशेष कार्याधिकारी आर0पी0पन्त, सेवा निवृत्त ब्रिगेडियर के.जी.बहल, अध्यक्ष आॅल इण्डिया इंजीनियरिंग संस्थान नरेन्द्र सिंह, फिल्म निर्देशक के.पी.ढौंडियाल सहित अन्य सामाजिक कार्यकत्र्ता एवं विभागीय अधिकारी मौजूद थे।