अल्मोड़ा/देहरादून: उत्तराखण्ड जहाॅ एक ओर देवी-देवताओं के लिए जाना जाता है, वहीं दूसरी ओर यह क्षेत्र संस्कृत विद्वानो का अध्ययन केन्द्र रहा है। यह बात मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आज कल्याणिका वेद वेदांग संस्कृत विद्यापीठम उदघाटन एवं लोकार्पण के अवसर पर कही। उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा के समग्र विकास हेतु एवं उसके संरक्षण के लिए हमें ठोस पहल करनी होगी। पर्वतीय क्षेत्रों में अनेक ऐसे आध्यात्मिक केन्द्र है,
जहाॅ पर संस्कृत विद्वानो ने आकर युवाओं को संस्कृत भाषा से जोड़ने का प्रयास किया और वेद-पुराणों में उल्लेखित अनेक जनश्रुतियों को सार्थक सिद्व करने के लिए प्रेरित किया। हमारे चार वेदो में संस्कृत भाषा की अपनी विशिष्ट पहचान रही है, हम सभी का प्रयास होगा कि इस पहचान को बनाये रखने के लिए संस्कृत भाषा के उन्ययन की पहल करनी होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जहाॅ एक ओर पूरे विश्व में योग का महत्व बढ़ा है, वहीं दूसरी ओर संस्कृत भाषा के लिए भी लोगो की जिज्ञासा और अधिक बढ़ गयी है। हमारे संस्कृत विद्वान कालीदास सहित अन्य विद्वानो ने हिमालय क्षेत्र का बखान अपने ग्रन्थों में किया है। संस्कृत विद्या जहाॅ एक ओर हमारे संस्कारों को आगे बढ़ाने में सार्थक सिद्व होती है, वहीं हमारे धार्मिक अनुष्ठानों में इसके पठन से आत्मिक शान्ति मिलती है। प्रदेश में स्थित राजकीय संग्रहालयों में संस्कृत ग्रन्थों के संरक्षण के लिए ठोस पहल की जा रही है, और शासन द्वारा संस्कृत विद्या से जुड़े पुरोहितों के लिए पेंशन दिये जाने का भी निर्णय लिया गया है, ताकि इस विद्या से जुड़े लोग अपनी आर्थिक मजबूती के लिए आगे बढ़ सके। विकासखण्ड लमगड़ा के डोल में स्थित यह आश्रम जहाॅ एक ओर हमें आध्यात्म की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करता है वही दूसरी ओर संस्कृत भाषा के संरक्षण के लिए भी कार्य कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में संस्कृत भाषा को पूर्व में द्वितीय राजभाषा के रूप में जो स्थान दिया गया है वह एक सराहनीय पहल है हमें संस्कृत के पठन-पाठन करने वालो को मदद देनी होगी। प्रदेश सरकार द्वारा संस्कृत विद्यालयों को विशेष अनुदान देकर उनको साधन सम्पन्न बनाने का काम किया गया है। संस्कृत हमारे प्रदेश में आजीविका का एक सशक्त साधन बन सकती है हमें सरकारोन्मुखी न बनकर समाजोन्मुखी बनने का प्रयास करना होगा ताकि हम संस्कृति की पताका फहराने में आगे बढ़ सके संस्कृत भाष पूरी भाषाओं की जननी है इसलिए हमें इस भाषा को सम्मान देना होगा। इस अवसर पर उन्होंने कल्याणिका आश्रम में संग्रहालय बनाने के लिए 01 करोड़ रू0 देने की बात कही साथ ही कल्याणिका आश्रम से स्थानीय डोल ग्राम को जोड़ने के लिए रोपवे की स्वीकृति के साथ ही आश्रम के समीप नाले में तटबन्ध बनाकर उसे झील के रूप में विकसित करने को कहा। मुख्यमंत्री ने संस्कृत विद्यालय को आगामी दो माह के अन्दर मान्यता दिलाने की बात कही।
विधानसभा अध्यक्ष गोविन्द सिंह कुजंवाल ने कहा कि कल्याणिका आश्रम के संस्थापक स्वामी पूज्यपाद बाबा कल्याण दास जी के द्वारा जिस परिकल्पना के साथ इस आश्रम की स्थापना की गयी थी उसके परिणाम आज सामने आ रहे है हमें इस आश्रम के विकास के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे। उन्होंने कल्याणिका आश्रम के विकास सहित अन्य स्थानीय समस्याओं की ओर ध्यान दिलाया, जिस पर मुख्यमंत्री ने इसका एक रोडमैप तैयार कर प्रस्तुत करें ताकि उस पर अग्रिम कार्यवाही की जा सके।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री दिनेश धनै ने कहा कि हमें इस तरह के रमणीक स्थलों को पर्यटन मानचित्र में लाकर पर्यटन सर्किट से जोड़ना होगा, ताकि अधिकाधिक लोग यहाॅ पर आ सके। उन्होंने विश्वास दिलाया कि वे इस रमणीक स्थल के विकास के लिए अपने स्तर से पूरी कोशिश करेंगे।
कार्यक्रम में सांसद भगत सिंह कोश्यारी, नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट, संसदीय सचिव मनोज तिवारी, पूर्व सासंद प्रदीप टम्टा, घनश्याम भट्ट सहित अन्य लोगो ने अपने विचार रखे। परमपूज्य कल्याण दास जी ने कहा कि पलायन को रोकने के लिए युवाओं को स्वालम्बी बनाना होगा। उत्तराखण्ड में पुराने पहाड़ों को पुर्नजिवित करने के साथ यहाॅ पर युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति को रोकना हमारा प्रयास होगा।
इस अवसर पर पूज्य कपिलेश्वरानन्द जी, राजेन्द्र जी, सदानन्द जी, नवराज जी, कृष्ण चैन्तय जी, नारायण हरि जी, शिवमनाथ सरस्वती जी, प्रेम चैतन्य जी, स्वामी कबीरा जी, जिलाधिकारी विनोद कुमार सुमन सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे।