लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने व्यापारियों के हित में सम्पूर्ण प्रक्रिया पूर्ण पारदर्शिता के साथ वाणिज्यकर विभाग के माध्यम से सुनिश्चित की है। वाणिज्यकर विभाग द्वारा व्यापार सम्बंधी समस्त क्रिया-कलापों का क्रियान्वयन आनलाईन के माध्यम से किया जा रहा है।
यह जानकारी वाणिज्यकर आयुक्त श्री मृत्युंजय कुमार नारायण ने दी। उन्होंने बताया कि कर निर्धारण के आदेश के पहले सभी प्रकार की नोटिस आनलाईन निर्गत होती है। सभी प्रकार के कर निर्धारण आदेश आनलाईन ही निर्गत होंगे। व्यापारी के हित में सभी प्रकार के फार्म जैसे फार्म-38, फार्म-21, फार्म-31, फार्म-सी, फार्म-एफ, फार्म-ई-01, फार्म-ई-02, एवं फार्म -एच वैकल्पिक रूप से आनलाईन उपलब्ध हैं।
वाणिज्यकर आयुक्त ने बताया कि व्यापारियों द्वारा दाखिल की जाने वाली वार्षिक विवरणी फार्म-26 को समाप्त करके इसके स्थान पर समेकित विवरणों की सरलीकृत व्यवस्था लागू कर दी गयी है। सिविल एवं विद्युत संविदाकारों के लिए पुरानी गाड़ियों की बिक्री के लिए टेण्ट, कनात, व्यापारियों तथा ईंट भट्ठों के कारोबारियों /मालिकों के लिए समाधान योजना लागू की गयी है। समाधान योजना अपनाने वाले व्यापारियों द्वारा अपंजीकृत व्यापारियों से खरीद किये जाने पर कर देयता को समाप्त कर दिया गया है। इसके लिए अधिनियम में आवश्यक संशोधन भी कर दिया गया है।
वाणिज्यकर आयुक्त ने बताया कि व्यापारियों के द्वार पर पंजीयन सुविधा लागू की गयी है। निर्गत पंजीयन में आनलाईन संशोधन की सुविधा तथा पंजीयन प्रमाण पत्र रजिस्टर्ड डाक से भेजे जाने की व्यवस्था वाणिज्यकर विभाग द्वारा की गयी है। व्यापारियों के लिए कर निर्धारण आदेश भी आनलाईन उपलब्ध करायें जा रहे हैं। व्यापारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे समय से वाणिज्यकर को जमा करें और प्रदेश के सर्वांगीण विकास में अपना बहुमूल्य योगदान दें।
वाणिज्य कर आयुक्त ने यह भी बताया कि वाणिज्यकर की वसूली में तेजी लाने तथा वाणिज्यकर अपवंचकों के विरूद्ध कठोर दण्डात्मक कार्रवाई करने, प्रर्वतन दलों को माल की सघन चेकिंग करने, कर अपवंचना पर प्रभावी रोकथाम के लिए ठोस एवं कारगर उपाय सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।