लखनऊ: श्री ओम प्रकाश सिंह, पुलिस महानिदेशक, उ0प्र0 द्वारा प्रदेश में कानून-व्यवस्था सुदृढ़ रखने और साम्प्रदायिक सौहार्द्र बनाये रखने हेतु राज्य सरकार की कटिबद्धता के अनुरूप प्रदेश के समस्त वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों/पुलिस अधीक्षकों को निम्न निर्देश दिये गये हैं:-
- साम्प्रदायिक सद्भाव बनाये रखने के लिये त्वरित एवं निष्पक्ष होकर प्रभावी कार्यवाही की जाये। यह देखा जाये कि साम्प्रदायिक तनाव किसी पक्ष की गलती के कारण उत्पन्न हुआ है, उस पक्ष को चिन्हित कर कार्यवाही सुनिश्चित की जाये।
- सम्प्रदायो संवाद तथा उनके मध्य आपसी संवाद बड़े संघर्ष को टाल सकता है। साम्प्रदायिक तनाव के कारणों को चिन्हित करते हुए उभय पक्षों में संवाद कराते हुए मामलों का समुचित समाधान समय से कराया जाये।
- अराजक तत्वों के मंसूबों को समय रहते निष्क्रिय करते हेतु नियमित रूप से आसूचना का संकलन, स्थानीय अभिसूचना इकाइयों, जनसामान्य एवं अन्य श्रोतों से किया जाय। प्राप्त होने वाली सूचनाओं का मूल्यांकन करते हुये उस पर समुचित एवं प्रभावी कार्यवाही की जाये।
- ऐसे तत्वों जिनके भ्रमण आदि से साम्प्रदायिक सद्भाव एवं समरसता पर विपरीत प्रभाव पड़ता हो, उनके सम्बन्ध में आसूचना का संकलन स्थानीय अभिसूचना इकाईयों, जन सामान्य एवं अन्य श्रोतों से किया जाये, तथा प्राप्त होने वाली सूचनाओें का मूल्यांकन करते हुये उनके विरूद्ध दं0प्र0स0 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अनुसार निरोधात्मक कार्यवाही की जाये।
- संवेदनशील स्थानों पर समुचित पुलिस व्यवस्था आदि का प्रबन्ध सुनिश्चित किया जाये।
- प्रत्येक संवेदनशील स्थल पर सी0सी0टी0वी0 कैमरा आदि इलेक्ट्रानिक उपकरणों से यथावश्यक निगरानी रखी जाये।
- ऐसे प्रकरणों, जिसके फलस्वरूप सामाजिक तनाव एवं साम्प्रदायिक विद्वेष की स्थिति बन सकती है, को समय रहते हुये चिन्हित किया जाये और प्रकरण की गम्भीरता के अनुरूप वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा मौके पर पहुँचकर विवाद का निराकरण किया जाय एवं दोषी व्यक्तियों के विरूद्ध अविलम्ब कार्यवाही की जाये।
- जिन स्थानों पर साम्प्रदायिक घटनायें घटित हई हैं, वहाॅं पर समुचित रूप से निरोधात्मक तथा अन्य विधिक कार्यवाही कराते हुये अराजक तत्वों पर कड़ी नजर रखी जाये। जहाॅं साम्प्रदायिक स्थिति बिगड़ने की आशंका परिलक्षित हो, वहाॅं आवश्यकतानुसार शान्ति समिति की बैठकें आयोजित की जायें, जिनमें सभी सम्प्रदायोें के गणमान्य तथा प्रभावशाली नागरिकों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाये।
- जनपद स्तर पर महत्वपूर्ण अवसरों, उदाहरणार्थ धार्मिक पर्व, रैली, शोभा यात्रा आदि का वार्षिक कलेन्डर रखा जाय तथा ऐसे अवसरों पर वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा स्थल निरीक्षण, आसूचना का संकलन कराते हुये अनुभवों एवं अवसरों की विशिष्टता तथा संवेदनशीलता के आधार पर समुचित प्रबन्ध पूर्व से ही सुनिश्चित कर लिये जायें।
- साम्प्रदायिक तनाव/घटना के फलस्वरूप पुलिस बल द्वारा जनपद के समस्त धार्मिक स्थलों (मन्दिर/मस्जिद आदि) की निगरानी रखी जाये तथा यह सुनिश्चित कर लिया जाय कि कोई अवांछनीय वस्तु धार्मिक स्थल के आस-पास मौजूद न हो।
- साम्प्रदायिक घटना के फलस्वरूप जुलूस निकालने की संभावना के दृष्टिगत जुलूस के मार्गों को पूर्व से चिन्हित कर मार्गों पर प्रभावी पुलिस-प्रबन्ध सुनिश्चित कराया जाये।
- लाउडस्पीकर/ध्वनि विस्तारक यन्त्रों के ध्वनि मानक एवं निर्धारित समय केे सम्बन्ध में इसका प्रयोग करने वाले सम्बन्धित व्यक्तियों/स्थलों के स्वामियों को भी हिदायत कर दी जाये।
- जनपद के सभी असामाजिक एवं साम्प्रदायिक तत्वों के विरूद्ध अभिलेखों को अद्यावधिक करा लिया जाय एवं ऐसे तत्वों के विरूद्ध धारा 116(3) द0प्र0स0 के अन्तर्गत निरूद्ध करने की कार्यवाही की जाये।
- असामाजिक तत्वों/साम्प्रदायिक माहौल बिगाड़ने वाले व्यक्तियों को चिन्हित कर उनके शस्त्र लाईसेंस निरस्तीकरण की कार्यवाही करायी जाये तथा ऐसे तत्वों के विरूद्ध नियमानुसार एन0एस0ए0/गैंगेस्टर एक्ट के अन्तर्गत निरोधात्मक कार्यवाही की जाये।
- सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक/भडकाऊ संदेश के वायरल होने पर अन्य जनपदों में भी साम्प्रदायिक सदभाव प्रभावित होने की प्रबल सम्भावना रहती है। अतः सोशल मीडिया यथा फेसबुक, व्हाट्स-अप, ट्विटर इत्यादि की अनवरत निगरानी कर सतर्क दृष्टि रखी जाये।
- किसी भी साम्प्रदायिक घटना को रोकने की कार्यवाही दृढ़ता, कठोरता एवं व्यवहार कुशलता से की जाये।
- मीडिया से समुचित संवाद स्थापित होना चाहिये तथा मीडिया कर्मियों को सही तथ्यों से तत्काल अवगत किया जाये।
- जनपद के थाना प्रभारियों/क्षेत्राधिकारियों/अन्य वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा क्षेत्र में भ्रमण कर साम्प्रदायिक दृष्टि से संवेदनशील एवं मुख्यतः मिश्रित जनसंख्या वाले स्थानों आदि को चिन्हित करते हुंये वहाँ समुचित निगरानी, सुरक्षा, आसूचना संकलन एवं प्रभावी पुलिस व्यवस्थायें सुनिश्चित की जाये।