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राज्य सरकार द्वारा उ0प्र0 इलेक्ट्राॅनिक्स विनिर्माण नीति-2014 के अन्तर्गत इकाइयों को प्रोत्साहन देने हेतु प्रक्रिया का निर्धारण किया गया

उत्तर प्रदेश
लखनऊ: 19 फरवरी, 2015, राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश इलेक्ट्राॅनिक्स विनिर्माण नीति-2014 के अन्तर्गत इकाइयों को प्रोत्साहन देने हेतु प्रक्रिया का निर्धारण कर दिया है। यह जानकारी आज यहां देते हुए राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा कि प्रदेश और देश के समग्र आर्थिक विकास के लिए उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्राॅनिक्स विनिर्माण उद्योग को प्रोत्साहित एवं विकसित कर उत्तर प्रदेश को एक वैश्विक प्रतिस्पर्धी, उद्योग मित्रवत इलेक्ट्राॅनिक्स विनिर्माण हब के रूप में स्थापित किए जाने एवं राज्य में व्यावसायिक वातावरण का निर्माण किए जाने, उ0प्र0 में इलेक्ट्राॅनिक्स मैन्युफैक्यरिंग क्लस्टर्स की स्थापना, राज्य में इलेक्ट्राॅनिक्स विनिर्माण के क्षेत्र में अधिकतम निवेश को आकर्षित करने तथा राज्य में रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने एवं प्रादेशिक सकल घरेलू उत्पादन (जी0डी0पी0) में वृद्धि के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश इलेक्ट्राॅनिक्स विनिर्माण नीति-2014 प्रख्यापित की गई है।

प्रवक्ता ने बताया कि उत्तर प्रदेश इलेक्ट्राॅनिक्स विनिर्माण नीति-2014 के अन्तर्गत राज्य में स्थापित हो रहे इलेक्ट्राॅनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स तथा इन ई0एम0सी0 में एकल ई0एस0डी0एम0 इकाइयों की स्थापना को परिलक्षित करते हुए 31 मार्च, 2019 को समाप्त होने वाली अवधि हेतु विभिन्न प्रोत्साहन प्रस्तावित किए गए हैं। ये प्रोत्साहन प्रथम 3 इलेक्ट्राॅनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स को
अनुमन्य होंगे, जिसे पुनः उक्त नीति के अन्तर्गत गठित सशक्त समिति के नियमानुसार स्थापित होने वाले अन्य इलेक्ट्राॅनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स के लिए विस्तारित किया जा सकता है।
उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश इलेक्ट्राॅनिक्स विनिर्माण नीति-2014 के प्रस्तर 4.4 में पेटेन्ट्स फाइलिंग हेतु प्रोत्साहन प्रदान किए जाने की व्यवस्था के अनुसार एम0एस0एम0ई0 इकाइयों में ही शोध एवं विकास को बढ़ावा देने के लिए घरेलू पेटेन्ट्स हेतु एक लाख रुपए तथा अन्तर्राष्ट्रीय पेटेन्ट्स हेतु पांच लाख रुपए की सीमा सहित, वास्तविक फाइलिंग लागत के 50 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति अनुमन्य होगी। इसके लिए पात्र इकाइयों को पेटेन्ट्स फाइलिंग हेतु प्रोत्साहन प्रदान किए जाने की कार्यवाही कतिपय शर्तों एवं प्रतिबन्धों के अधीन की जाएगी।
इस नीति के अन्तर्गत प्रोत्साहन प्राप्त करने के लिए वे इकाइयों ही पात्र होंगी, जो सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योग मंत्रालय तथा भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार एम0एस0एम0ई0 उद्योग की परिभाषा में आती हों। यह प्रोत्साहन पूरे प्रदेश में शासनादेश के निर्गत होने की तिथि से 31 मार्च, 2019 को समाप्त होने वाली अवधि के अन्दर पेटेन्ट्स फाइलिंग करने वाली इकाइयों को अनुमन्य होगा।
इस नीति के अन्तर्गत जिन इलेक्ट्राॅनिक्स उत्पादों को सम्मिलित किया गया है, वे हैं-मोबाइल उपकरण: मोबाइल हैण्डसेट, दूरसंचार उपकरण: माॅडेम, राइटर्स, स्विचेज इत्यादि, उपभोक्ता इलेक्ट्राॅनिक्स: टी0वी0, डी0वी0डी प्लेयर्स, डिजिटल कैमरे, सेट टाॅप बाॅक्सेज इत्यादि, आटोमोबाइल इलेक्ट्राॅनिक्स: विद्युत वाहन, पावर विण्डो इत्यादि, औद्योगिक इलेक्ट्राॅनिक्स: पावर इलेक्ट्राॅनिक्स, एल0ई0डी0, लाइटिंग, सी0एफ0एल0 एनर्जी मीटर इत्यादि, सूचना प्रौद्योगिकी प्रणाली एवं हार्डवेयर: डेस्कटाॅप, नोटबुक, टैबलेट, माॅनीटर्स, मेमोरी कार्ड इत्यादि, अन्य इलेक्ट्राॅनिक्स: एयरोस्पेस, रक्षा उपकरण सहित सामरिक उपकरण।
साथ ही, इलेक्ट्राॅनिक्स कम्पोनेन्ट के अन्तर्गत एक्टिव कम्पोनेन्ट्स: ट्रांजिस्टर्स, डायोड्स तथा सी0आर0टी0, पैसिव कम्पोनेन्ट्स: रेजिस्टर्स तथा कैपेसिटर्स, इलेक्ट्रोमेकेनिकल कम्पोनेन्ट्स: पी0सी0बी0, पावर डिवाइसेज, रिले इत्यादि को सम्मिलित किया गया है।
इसके अलावा, सेमीकण्डक्टर डिजाइन श्रेणी के अन्तर्गत-एम्बेडेड साॅटवेयर डेवलेपमेन्ट, वी0एल0एस0आई0 डिजाइन तथा हार्डवेयर/बोर्ड डिजाइन को भी सम्मिलित किया गया है।
यह प्रोत्साहन, पात्र इकाइयों को केस-टु-केस आधार पर परीक्षण उपरान्त प्रदान किया जाएगा। पात्र इकाई द्वारा पेटेन्ट्स हेतु सम्बन्धित संस्था को आवेदन करने और उसके लिए पेटेन्ट्स फाइलिंग शुल्क जमा कर दिए जाने के सम्बन्ध में इकाई द्वारा नोडल एजेन्सी को सूचित किया जाएगा। पेटेन्ट्स फाइलिंग हेतु प्रोत्साहन प्राप्त करने के लिए इकाई द्वारा आवेदन नोडल एजेन्सी के निर्धारित प्रारूप में प्रस्तुत किया जाएगा।
आवेदन पत्र के साथ जिन अभिलेखों को संलग्न करना आवश्यक होगा, वे हैं-पेटेन्ट कार्यालय द्वारा प्रदत्त पेटेन्ट पंजीयन प्रमाण पत्र की प्रति, स्वच्छ सूचकों के साथ विशिष्टियों/विन्यास/चित्र, आई0एस0ओ0/आई0एस0आई0 प्रमाण पत्र की सत्यापित प्रति (यदि हो तो), पेटेन्ट पंजीयन पर हुए व्यय का विस्तृत विवरण (इन्वाॅयस और रसीदों की सत्यापित प्रति सहित), संयंत्र एवं मशीनों पर निवेश के प्रमाण-स्वरूप चार्टर्ड एकाउन्टेन्ट का प्रमाण पत्र, आवेदक इकाई के स्वामी/साझेदार/प्रबन्ध निदेशक का शपथ पत्र। आवेदक द्वारा उत्तर प्रदेश विनिर्माण नीति-2014 के अन्तर्गत प्राप्त किए गए प्रोत्साहन/छूट का अद्यतन विवरण चार्टर्ड एकाउन्टेन्ट के प्रमाण पत्र सहित उपलब्ध कराना आवश्यक होगा। साथ ही, आवेदन पत्र का प्रोसेसिंग शुल्क (यदि कोई देय हो), इकाई द्वारा वहन किया जाएगा तथा आवेदन प्रस्तुति के समय जमा किया जाएगा।
प्रोत्साहन की स्वीकृति के लिए नोडल एजेन्सी, इकाई द्वारा प्रस्तुत आवेदन पत्र एवं संलग्न दस्तावेजों का परीक्षण करेगी। यह कार्यवाही यथा सम्भव आवेदन पत्र प्राप्त होने की तिथि से एक माह के अन्दर पूर्ण कर ली जाएगी। इकाई द्वारा आवेदन पत्र के साथ संलग्न दस्तावेजों में दी गई सूचना अपूर्ण होने की स्थिति में नोडल एजेन्सी द्वारा इकाई से स्थिति स्पष्ट कराई जा सकती है अथवा अतिरिक्त सूचनाओं/विवरण की मांग की जा सकती है। नोडल एजेन्सी द्वारा मांगे गए स्पष्टीकरण व अतिरिक्त अभिलेखों आदि को सम्बन्धित इकाई को नोडल एजेन्सी द्वारा निर्धारित अवधि के अन्दर प्रस्तुत करना होगा।
इकाई द्वारा प्रस्तुत आवेदन के परीक्षण/सत्यापन के उपरान्त इकाई को पेटेन्ट्स फाइलिंग प्रोत्साहन अनुमन्य कराने के सम्बन्ध में नोडल एजेन्सी की संस्तुति पर सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, उत्तर प्रदेश शासन के विचारार्थ आवेदन प्रेषित किया जाएगा। सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा नोडल एजेन्सी से प्राप्त संस्तुति पर विचारोपरान्त निर्णय लिया जाएगा और उपयुक्त आदेश निर्गत किया जाएगा।
पेटेन्ट्स फाइलिंग हेतु प्रोत्साहन की प्राप्ति के लिए पात्र इकाई द्वारा उन सभी अनुबन्धों तथा अभिलेखों को निष्पादित किया जाएगा, जो नोडल एजेन्सी के मतानुसार आवश्यक हों। वे सभी सूचनाएं नोडल एजेन्सी को उपलब्ध कराई जाएंगी, जो उनके द्वारा अपेक्षित हैं। किसी भी प्रकार के विवाद की स्थिति में प्राधिकृत संस्थाओं के मुख्यालय पर स्थित न्यायालयों में ही वाद दायर किया जा सकेगा। पेटेन्ट्स फाइलिंग हेतु प्रोत्साहन की प्राप्ति के लिए सभी प्रासंगिक व्यय, पात्र इकाई के द्वारा देय होगा।
इस योजना के किसी बिन्दु पर शंका निवारण अथवा समस्या समाधान हेतु आदेश आई0टी0 एवं इलेक्ट्राॅनिक्स विभाग द्वारा जारी किया जाएगा। प्रार्थना पत्र अस्वीकृति के विरुद्ध प्रत्यावेदन पर सुनवाई प्रमुख सचिव आई0टी0 एवं इलेक्ट्राॅनिक्स विभाग की अध्यक्षता में गठित एक समिति करेगी, जिसमें प्रमुख सचिव वित्त द्वारा नामित नोडल अधिकारी (जो विशेष सचिव से निम्न स्तर का न हो), प्रमुख सचिव औद्योगिक विकास विभाग द्वारा नामित नोडल अधिकारी (जो विशेष सचिव से निम्न स्तर का न हो) तथा निदेशक इलेक्ट्राॅनिक्स मिशन निदेशालय सदस्य होंगे।
इकाई द्वारा प्राप्त किए गए लाभों के उपरान्त यदि किसी समय यह पाया जाता है कि इकाई द्वारा दी गई सूचनाएं गलत हैं अथवा तथ्यों को छिपाकर गलत आंकड़ों/अभिलेखों के आधार पर प्रोत्साहन प्राप्त किया गया है, तो वितरित प्रोत्साहन की धनराशि 15 प्रतिशत ब्याज सहित प्राप्त की जाएगी तथा धनराशि भुगतान न करने पर यह धनराशि भू-राजस्व बकाए के रूप में वसूल की जाएगी। साथ ही, इकाई के विरुद्ध वैधानिक कार्यवाही भी की जाएगी।

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