बच्चों का उत्पीड़न हुआ तो स्कूल होंगे जिम्मेदार

उत्तर प्रदेश

लखनऊ: स्कूलों में बच्चों का शरीरिक उत्पीड़न रोकने के लिए प्रदेश सरकार ने नियम बना दिए हैं। यदि बच्चे के साथ कोई भी घटना होती है तो उसके लिए स्कूल जिम्मेदार होंगे। इस बारे में माध्यमिक शिक्षा विभाग ने मंगलवार को शासना देश जारी कर दिया। इस शासनादेश के मुताबिक स्कूल में सुरक्षित बिल्डिंग, स्कूल वाहन में जीपीआरएस सिस्टम की अनिवार्यता और स्टाफ के पुलिस वेरिफिकेशन तक के नियम सरकार ने बनाए हैं। ये नियम सभी बोर्ड के सरकारी और प्राइवेट स्कूलों पर लागू होंगे।

इन नियमों का पालन करेंगे स्कूल

-स्कूल में बच्चों के शरीरिक, मानसिक शोषण और बाल अपराध की शिकायत आती है तो स्कूल जिम्मेदार होगा।

-शिकायत पर संबंधित स्कूल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

-स्कूल की बिल्डिंग इस तरह होनी चाहिए कि प्रांगण में खड़े होकर क्लासरूम और मुख्य द्वार नजर आएं।

-हर क्लासरूम का एक दरवाजा व खिड़की मुख्य प्रांगण की ओर खुलते हों।

-प्राइमरी और उससे ऊपर की कक्षाओं के लिए प्राइमरी और अन्य कक्षाओं के लिए अलग ब्लॉक होने चाहिए।

-प्राइमरी कक्षाओं में बड़ी कक्षाओं के बच्चे और अंशकालिक कर्मचारियों को बिना अनुमति जाने की अनुमति नहीं होगी।

-सुरक्षित बाउंड्री हो, मुख्य गेट बंद रहेगा और बिना अनुमति किसी के आने-जाने की अनुमति नहीं होगी।

-क्लास चलते समय क्लासरूम की खिड़की और दरवाजे बंद रहेंगे।

-एक्स्ट्रा क्लास और खेलकूद की गतिविधियों पर छात्र-छात्राओं का जिम्मा शिक्षकों पर होगा।

-सभी छात्र-छात्राओं और शिक्षकों के जाने के बाद ही प्रधानाचार्य घर जाएंगे।

-स्कूल प्रबंधन ट्रांसपोर्ट सुविधा उपलब्ध कराता है तो उसमें जीपीआरएस सिस्टम होना चाहिए।

-प्राइवेट गाड़ियां लगाने से पहले उसके स्टाफ के चरित्र का वेरिफिकेशन कराया जाएगा।

-कोई भी नया ड्राइवर या क्लीनर आता है तो उसका पुलिस वेरिफिकेशन कराया जाएगा।

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