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FRDC के अन्तर्गत गठित ‘‘उच्चाधिकार प्राप्त विषय विशेषज्ञ समूह‘‘ की बैठक की अध्यक्षता करते हुएः मुख्यमंत्री

उत्तराखंड
देहरादून: प्रदेश की आर्थिकी में कृषि क्षेत्र पर अधिक बल देना होगा। जड़ीबूटी, पुष्पोत्पादन, फलोत्पादन, कृषि, दुग्धोत्पादन आदि क्षेत्रों में पर्वतीय क्षेत्र के अनुकूल प्रभावी नीतियां बनायी जाने की आवश्यकता है। किसानों को बेहतर सुविधाएं और नई तकनीक का लाभ मिले, ताकि उनकी उपज बढ सके।

विभिन्न क्षेत्रों के विषय विशेषज्ञों द्वारा दिये गये सुझाव राज्यहित में उपयोगी सिद्ध होंगे। यह बात मुख्यमंत्री हरीश रावत ने शुक्रवार को कैन्ट रोड़ स्थित मुख्यमंत्री आवास पर वन एवं ग्राम्य विकास शाखा के अन्तर्गत गठित ‘‘उच्चाधिकार प्राप्त विषय विशेषज्ञ समूह की प्रथम बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही।
मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि प्रदेश में कृषि क्षेत्र को आर्थिकी का मुख्य आधार बनाया जाय। इसके लिए राज्य सरकार ने ठोस कार्ययोजना बनायी है। कई महत्वपूर्ण योजनाएं भी शुरू की है, जिनका लाभ आम आदमी को मिलेगा। पर्वतीय क्षेत्रों से लोगों का पलायन न हो, इसके लिए ऐसी योजनाएं शुरू की जा रही है, जिससे फिर से लोग कृषि की ओर आकर्षित होंगे। हमारा प्रयास मैदानी क्षेत्र में आये ठहराव को दूर करना है। साथ ही पर्वतीय खेती को पुनर्जीवित करना है। पहाड़ो से खेती का कम होना भी चिन्ता का विषय है। इस दिशा में प्रभावी पहल की जरूरत है। राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि प्रदेश में माल्टा, राजमा व बी. विलेज बनायें जायेंगे। कलस्टर आधारित खेती व हार्टिकल्चर को बढ़ावा देने के लिए 4-4 कलस्टर गढ़वाल व कुमांयू में बनाये जायेंगे। किसानों के लिए किसान पेंशन देने का निर्णय लिया गया है। कृषि क्षेत्र में तीन साल का कार्यक्रम बनाया गया है। खेती की सुरक्षा दीवार जंगली जानवर व मानव संघर्ष को कम करने के उपाय किये जा रहे है। चाल-खाल के माध्यम से जल संरक्षण को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके लिए वाटर बोनस दिया जायेगा। मंडुआ थ्रेसर के साथ ही उत्पादन पर सब्सिडी, पाॅलिहाउसों के लिये केन्द्र सरकार के अलावा 20प्रतिशत अतिरिक्त छूट, हार्टिकल्चर को बढावा देने के लिये गढ़वाल व कुमांयू में दो वाइनरी स्थापित की जायेगी, ताकि 70 प्रतिशत फलों का इसमें उपयोग हो, इससे इनकी डिमाण्ड बढेगी। प्रदेश में चिन्हित क्षेत्रों में भेड़ व बकरी के लिए भी कलस्टर विकसित किये जायेंगे।
मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि प्रदेश में बेहतर संस्थान व संसाधन होने के बाद भी उनका उपयोग कम होना चिन्ता का विषय है। आज की इस बैठक से नये विचार सामने आयेंगे, जो प्रदेश में कृषि को भी फिर से आजीविका से जोड़ने में मददगार साबित होंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में चकबंदी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रदेश में मिशन पलसेस (दाल) के माध्यम से दालों के उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके ठोस कार्ययोजना बनायी जा रही है। बी. कीपिंग को बढ़ावा देने के लिए मास्टर ट्रेनर के साथ ही प्रत्येक जनपद में प्रशिक्षण की व्यवस्था की जायेगी। इसके लिए राज्य में बी. बोर्ड को और अधिक प्रभावी बनाया जायेगा। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि आज की बैठक में विशेषज्ञों द्वारा दिये जाने वाले सुझाव के आधार पर भविष्य के लिए और कारगर योजना बनायी जायेगी।
उच्चाधिकार प्राप्त विषय विशेषज्ञ समूह के सदस्य सचिव डाॅ. मनोज शर्मा ने बताया कि आज की बैठक में कृषि, बागवानी एवं पशुपालन में उत्पादकता वृद्धि, कृषि क्षेत्र में उद्यमिता का विकास, रोजगार सृजन, सामुदायिक वनीकरण के द्वारा ग्रामीणों की आय में कृषि हेतु कार्यक्रम तैयार करना, वनों को ग्रामीणों की आर्थिकी से जोड़ने की योजनायें तैयार कराना, पलायन को अवरूद्ध करने हेतु प्रयास, बेरोजगारी के उन्मूलन हेतु कृषि क्षेत्र में रोजगार के अवसरों का सृजन, बेरोजगारी के उन्मूलन हेतु कृषि क्षेत्र में रोजगार के अवसरों का सृजन तथा वर्तमान में एफ.आर.डी.सी. के अन्तर्गत प्रचलित नीतियों एवं योजनाओं की समीक्षा आदि बिन्दुओं को एजेण्डे के रूप में रखा गया था।
बैठक में मुख्य सचिव एन.रवि शंकर, अपर मुख्य सचिव एस.राजू, प्रमुख सचिव ओम प्रकाश, डा. एच. एस. गुप्ता, पूर्व निदेशक पूसा एवं महानिदेशक, बाॅरलाॅक संस्थान, डाॅ. एन. सी. शर्मा पूर्व कुलपति एवं पूर्व निदेशक भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान बरेली, डाॅ. एन.सी.शर्मा, पूर्व विभागाध्यक्ष उद्यान विभाग, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय श्रीनगर डाॅ. बी.एल.सारस्वत, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, राष्ट्रीय मौनपालन बोर्ड एवं निदेशक, सहकारिता, भारत सरकार, डाॅ. डी. पी. पाॅलीवाल, प्रधान वैज्ञानिक केन्द्रीय रेशम बोर्ड बागेश्वर, भारत सरकार, डाॅ आशुतोष कुमार वरिष्ठ वैज्ञानिक डेयरी एवं दुग्ध विकास, एन.डी.आर.आई. करनाल डाॅ. बी.के. चैधरी, जैविक कृषि एवं आजीविका वल्र्ड विजन संस्था विकासनगर देहरादून, डाॅ रमेश उनियाल, औषधीय एवं सगन्ध पादप सलाहकार, यू.एन.डी.पी. नई दिल्ली एवं अरविन्द शर्मा सलाहकार खाद्य एवं प्रसंस्करण एवं खाद्य आपूर्ति श्रृंखला आई.आई.एफ.टी. नई दिल्ली आदि उपस्थित थे।

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